8वी फ़ैल, 21 साल का लड़का कैसे बना करो

लोगो से हम अक्सर यह बात सुनते हे की अगर आप पढाई में असफल हो जाएं तो जरूरी नहीं कि आप ज़िन्दगी में भी असफल हो जायेंगे। कुछ लोग अपनी शुरूआती असफलता के बाद सफलता की ऐसी इबादत लिखते हैं, जो किताबों तक में लिख दी जाती है।

इन्सान चाह ले तो उसे कामयाबी मिलने से कोई रोक नही सकता। यहाँ हम आज बात कर रहे हे त्रिशनित अरोङा की, जो आठवीं के एग्जाम मे फेल हो गये थे। पर अपने पंसद और लक्ष्य से डिगे नही और आज सारी दुनिया इनकी सफलता को सलाम कर रही है।

इनका जन्म 2 नवम्बर 1993 को पंजाब के लुधियाना मे हुआ था। इनकी बचपन से ही कम्प्यूटर में गहरी दिलचस्पी थी। जिसके कारण अपनी पढ़ाई पर ये ध्यान न दे सके और आठवीं की परीक्षा में दो पेपर नहीं देने के कारण परीक्षा में फेल हो गये। लेकिन अपने परिश्रम से इन्होने वो कर दिखाया जो बहुत कम लोग ही सोच सकते है। तभी तो महज 22 साल की उम्र में इन्होने लाखों का कारोबार खङा कर दिया है।

त्रिशनित एक एथिकल हैकर हैं। इथिकल हैकिंग में नेटवर्क या सिस्टम इन्फ्रास्ट्रक्चर की सिक्युरिटी इवैल्युएट की जाती है। सर्टिफाइड हैकर्स इसकी निगरानी करते हैं, ताकि कोई नेटवर्क या सिस्टम (कम्प्यूटर) इन्फ्रास्ट्रक्चर की सिक्युरिटी तोड़कर कॉन्फिडेन्शियल चीजें न तो उड़ा सके और न ही वायरस या दूसरे मीडियम्स के जरिए कोई नुकसान पहुंचा सके।

त्रिशनितने अपने हुनर से कईयो को ट्रेन करके नेटवर्किँग की सुरक्षा का जिम्मा लिया। मिडल क्लास फैमिली में पैदा हुए त्रिशनित अरोड़ा का बपचन से ही पढ़ाई में मन नहीं लगता था। इनकी कम्प्यूटर में इतनी रुचि थी कि सारा वक्त इसी में चला जाता था और बाकी सब्जेक्ट्स पर ये ध्यान ही नही दे पाते थे। कम्प्यूटिंग पढ़ने में इतना मग्न हो गये कि पढ़ाई ही नहीं की। दो पेपर नहीं दिए और फेल हो गये, मम्मी-पापा से इन्हे खूब डांट पङी। दोस्त और परिवार के लोगो भी मजाक उड़ाया, लेकिन इन्होने हिम्मत नहीं हारी। फेल होने के बाद रेग्युलर पढ़ाई छोङ दी और आगे 12वीं तक की पढ़ाई उन्होंने कॉरेस्पॉन्डेंस से की। इन्होने अपना पुरा ध्यान कम्प्यूटर पर लगाया और इसके साथ-साथ ये कम्प्यूटर और हैकिंग के क्षेत्र से गहराई से जुङते चले गये।

इसके साथ-साथ वे कम्प्यूटर और हैकिंग के बारे में लगातार नई जानकारियां भी इकट्‌ठा करते रहे। उनकी हाउस वाइफ मां और अकाउंटेंट पिता इस काम को पसंद नहीं करते थे। लेकिन त्रिशनित कम्प्यूटर में अपने शौक को ही करियर बनाने का फैसला कर चुके थे। अपनी मेहनत,लगन और शौक के दम पर – धीरे-धीरे इनके काम को सब जानने लगे। जब इनकी उम्र 21 वर्ष थी, तब ईन्होंने टीएसी सिक्युरिटी नाम की साइबर सिक्युरिटी कंपनी बनाई थी। और अब रिलायंस, सीबीआई, पंजाब पुलिस, गुजरात पुलिस, अमूल और एवन साइकिल जैसी कम्पनियो को साइबर से जुड़ी सर्विसेज दे रहे हैं।

उनके काम को लेकर 2013 में गुजरात में पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने उन्हें सम्मानित किया। 2014 में इसी काम को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने गणतंत्र दिवस पर ‘स्टेट अवार्ड ’ दिया। 2015 में उनको फिल्म एक्टर आयुष्मान खुराना सहित सात हस्तियों के साथ पंजाबी आइकॉन अवार्ड दिया गया।

त्रिशनित की कमाई करोड़ों रुपए में आंकी जाती है। एक इंटरव्यू में भी उन्होंने बताया था कि फिलहाल उनकी नजर कंपनी का टर्नओवर 2000 करोड़ रुपए तक पहुंचाना है।दुबई और यूके में इनके कंपनी का वर्चुअल ऑफिस है। करीब 40% क्लाइंट्स इन्हीं ऑफिसेस से डील करते हैं। – दुनियाभर में 50 फॉर्च्यून और 500 कंपनियां क्लाइंट हैं। इन्होंने नॉर्थ इंडिया की पहली साइबर इमरजेंसी रेस्पॉन्स टीम का सेटअप किया।

22 साल के त्रिशनित का कहना है कि फेल होने के बाद उन्हें ये समझ में आया कि ‘पैशन’ के आगे पढ़ाई मायने नहीं रखती। और सफलता वही है जहा अपने काम के प्रति लगाव हो। हालांकि, यह डिग्री या फॉर्मल एजुकेशन को कामयाबी या नौकरी के लिए जरूरी नहीं मानते, स्कूली पढ़ाई को उतना ही महत्व दीजिए जितना जरूरी है। ये जीवन का हिस्सा है लेकिन पूरा जीवन नहीं है। फिलहाल वह अपने काम में व्यस्त हैं, लेकिन पढ़ाई को छोड़ना नहीं चाहते। भविष्य में वक्त मिलने पर मैनेजमेंट के साथ ग्रैजुएशन करना चाहेंगे। हालांकि, वह डिग्री या फॉर्मल एजुकेशन को कामयाबी या जीवनयापन के लिए जरूरी नहीं मानते।

इनका ये भी मानना हैं कि असफलताओं से कभी निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि असफलताएं ही आगे बढ़ने का रास्ता बताती हैं और आपको अपने मजबूत पक्ष का बेहतर पता चलता है। अपने लगाव, हुनर, परिश्रम और सूझ-बूझ से इन्होने 22 साल कि उम्र मे जो कंपनी खङी की है वो इनके कङी मेहनत को दिखाता है। इतनी छोटी उम्र मे सफलता के झंडे गाङकर इन्होने एक बार फिर साबित कर दिया कि सफलता उम्र नही परिश्रम व् लक्ष्य के प्रति लगन देखती है। इन्होने कुछ किताबे जैसे ‘हैकिंग टॉक विद त्रिशनित अरोड़ा’, ‘दि हैकिंग एरा’ और ‘हैकिंग विद स्मार्ट फोन्स’ लिख चुके हैं।

एक लड़का जिसका एक समय कोई भी अस्तित्व नहीं था, आज वो देश के युवाओ के लिए रोलमॉडल बन चूका हे। आशा करते हे की आपको यह कहानी जरूर पसंद आयी होगी। तो हमारे यह आर्टिकल को जरूर से लाइक करे और शेयर भी करे।