धरती पर पहला जीव कैसे आया, वैज्ञानिकों द्वारा सॉल्व किया गया

दुनिया के सैकड़ों वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं कि आखिर धरती पर जीवन कैसे आया? इस लिहाज से वैज्ञानिकों को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है।

यह विशाल हिमनद द्वारा पूरे पर्वत श्रृंखलाओं के सैकड़ों करोड़ों वर्षों तक जमीनी स्तर पर फैली एक कहानी है, जो एक बार ग्रह और नाटकीय जलवायु परिवर्तन को कवर करती है जो एक नए जैविक युग की शुरुआत करती है।

पृथ्वी पर जीवन सरल बॅक्टेरिआ द्वारा लगभग 650 मिलियन साल पहले तक प्रभुत्व में था जब जीवन के अधिक जटिल रूपों ने अचानक इसे संभाला।

ऐसा होने के कारणों में एक रहस्य था। आइए जानते हैं परत-दर-परत की कैसे धरती पर आया जीवन:

ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी के वैज्ञानिकों ने अब पृथ्वी पर जीवन का एक ऐसा महत्वपूर्ण क्षण स्थापित करने का दावा किया है, जिसमें कीटों से लेकर डायनासोर और इंसानों तक, जीव-जंतुओं की एक विशाल सरणी में विकसित होने की संभावना है। वैज्ञानिक बताते हैं कि इस पूरी प्रक्रिया में स्नोबॉल अर्थ (SnowBall Earth) की अहम भूमिका है।

SnowBall Earth और जीवन:

यह “पारिस्थितिक तंत्र की क्रांति” लगभग 700 मिलियन साल पहले शुरू हुई थी जब ग्रह बन गया था जिसे ‘स्नोबॉल अर्थ’के रूप में जाना जाता है। जिसमें माना जाता है कि जीवन से पहले धरती की पूरी सतह बर्फ से जमी हुई थी। इस दौरान बर्फ के पहाड़ धरती को ढंके रहते थे, जिनसे न्यूट्रिएंट्स (एक तरह का पोषक तत्व) निकलता रहता था।

ऐसे में समंदर में भारी मात्रा में न्यूट्रिएंट्स जमा हो गया। धीरे-धीरे जब वैश्विक तापमान में गिरावट आई तो ये परफेक्ट कंडीशन था। इस दौरान न्यूट्रिएंट्स की मौजदूगी से ‘शैवाल’ तेजी से पनपने लगे। बाद में इन्हीं शैवालों के जरिए धरती पर धीरे-धीरे जीवन का विकास किया।

ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के रिसर्च में पता लगाया गया है कि जीवन का विकास 65 करोड़ साल पहले शैवाल (Algae)के उदय के कारण हुआ।

पहले ये जान लीजिए की शैवाल(Algae)क्या होता है?

शैवाल (Algae) को आपने नम दीवारों, तालाब, नदी के किनारे या समंदर के किनारे पर देखा होगा। हरे रंग का ये पौधा बेहद सरल जीव (ORGANISM) है। साइंस की भाषा में इनका वर्गीकरण क्रिप्टोगैम के तौर पर किया गया है यानी ऐसे पौधे जो फूल और बीज नहीं पैदा करते हैं।

रिसर्च की खास बातें:

शोधकर्ताओं में से एक, द ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी (एएनयू) के डॉ जोचेन ब्रोक्स ने कहा कि उन्हें इस बात के सबूत मिले हैं, इस अवधि में प्राचीन अवसादी चट्टानों (sedimentary rocks) का विश्लेषण किया गया। पहले इन चट्टानों को तोड़कर पाउडर फॉर्म में बदल दिया गया, फिर इसमें से प्राचीन जीवों के अणुओं (Molecules) को निकाला गया।

उन्होंने कहा, “ये अणु हमें बताते हैं कि 650 मिलियन साल पहले यह वास्तव में दिलचस्प हो गया था। यह पूरे इको-सिस्टम में एक क्रांति थी, यह शैवाल का उदय था”।

डॉ ब्रोक्स ने कहा, “खाद्य वेब के आधार पर इन बड़े और पौष्टिक जीवों ने जटिल पारिस्थितिक तंत्रों के विकास के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान की है, जहां तेजी से बड़े और जटिल जानवर,  मनुष्यों सहित शामिल हैं, जो पृथ्वी पर पनप सकते हैं।”

एएनयू के डॉ एम्बर जेरेट ने भी कहा: “इन चट्टानों में हमने आणविक जीवाश्मों के हड़ताली संकेतों की खोज की।”

इस रिसर्च का पूरा वर्णन Nature जर्नल में प्रकाशित एक पेपर में किया गया था।

पेपर ने उल्लेख किया कि शैवाल वास्तव में अध्ययन की अवधि से काफी पहले विकसित हुआ था, कुछ 900 मिलियन से 1.9 अरब साल पहले तक।

हालांकि, शोधकर्ताओं ने लिखा: “जीवाश्म स्टेरॉयड के सही रिकॉर्ड से पता चलता है कि शैवाल ने 659 से 645 मिलियन साल पहले मुख्य समुद्री प्राथमिक उत्पादकों के रूप में फोटोट्रॉफिक बैक्टीरिया की अशुद्धता को तोड़ दिया था।

“यह नई समय सीमा वायुमंडलीय ऑक्सीजन के स्तर में Neoproterozoic / Paleozoic वृद्धि के लिए स्पष्टीकरण का एक नेटवर्क, अधिक आधुनिक पोषक तत्वों और कार्बन चक्रों की स्थापना, और एक तेजी से जटिल बायोटा [जीवन] का विकास प्रदान करता है।”

ये पूरा रिसर्च ये भी साबित कर रहा है कि स्नोबॉल अर्थ, परिकल्पना के तार धरती पर जीवन से जुड़े हुए हैं। बता दें कि इससे पहले के रिसर्च तक हमें मालूम था कि धरती पर जीवन बैक्टीरिया के जरिए ही हुआ, बैक्टीरिया के ही विकास से दूसरे जीवों का उदय हुआ। शैवाल और बैक्टीरिया दोनों ही एक सेल (Cell) वाली संरचना है, इसके बावजूद बैक्टीरिया से ज्यादा कॉम्प्लेक्स शैवाल है।